वाल्मीकि रामायण 1.68.19
मंत्रिणः तु नरेन्द्रस्य रात्रिम् परम सत्कृताः ।ऊषुः प्रमुदिताः सर्वे गुणैः सर्वैः समन्विताः॥
maṃtriṇaḥ tu narendrasya rātrim parama satkṛtāḥ |ūṣuḥ pramuditāḥ sarve guṇaiḥ sarvaiḥ samanvitāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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