वाल्मीकि रामायण 2.10.2
निश्चित्य मनसा कृत्यम् सा सम्यगिति भामिनी ।मन्थरायै श्नः सर्वमाच्चक्षे विचक्षणा॥
niścitya manasā kṛtyam sā samyagiti bhāminī |mantharāyai śnaḥ sarvamāccakṣe vicakṣaṇā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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