वाल्मीकि रामायण 2.10.4
मुहूर्तं चिन्तयामास मार्गमात्मसुखावहम् ।सा सुहृच्चार्थकामा च तं निशम्य सुनिश्चयम्॥
muhūrtaṃ cintayāmāsa mārgamātmasukhāvaham |sā suhṛccārthakāmā ca taṃ niśamya suniścayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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