वाल्मीकि रामायण 2.104.25
स च प्रमाणं धर्मात्मा राजा लोकगुरुस्तव ।पित्रा दत्तं यथाभागमुपभोक्तुं त्वमर्हसि॥
sa ca pramāṇaṃ dharmātmā rājā lokagurustava |pitrā dattaṃ yathābhāgamupabhoktuṃ tvamarhasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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