वाल्मीकि रामायण 2.104.5
आर्य्यं तात: परित्यज्य कृत्वा कर्म सुदुष्करम् ।गत: स्वर्गं महाबाहु: पुत्रशोकाभिपीडित:॥
āryyaṃ tāta: parityajya kṛtvā karma suduṣkaram |gata: svargaṃ mahābāhu: putraśokābhipīḍita: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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