वाल्मीकि रामायण 2.111.27
धर्मात्मा तस्य तथ्येन भ्रातुर्वाक्येन विस्मित: ।उवाच राम: सम्प्रेक्ष्य पौरजानपदं जनम्॥
dharmātmā tasya tathyena bhrāturvākyena vismita: |uvāca rāma: samprekṣya paurajānapadaṃ janam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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