वाल्मीकि रामायण 2.111.32
वृतो राजा हि कैकेय्या मया तद्वचनं कृतम् ।अनृतन्मोचयानेन पितरं तं महीपतिम्॥
vṛto rājā hi kaikeyyā mayā tadvacanaṃ kṛtam |anṛtanmocayānena pitaraṃ taṃ mahīpatim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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