वाल्मीकि रामायण 2.113.16
नैतच्चित्रं नरव्याघ्र शीलवृत्तवतां वर ।यदार्यं त्वयि तिष्ठेत्तु निम्ने सृष्टमिवोदकम्॥
naitaccitraṃ naravyāghra śīlavṛttavatāṃ vara |yadāryaṃ tvayi tiṣṭhettu nimne sṛṣṭamivodakam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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