वाल्मीकि रामायण 2.113.3
मन्दाकिनीं नदीं रम्यां प्राङ्मुखास्ते ययुस्तदा ।प्रदक्षिणं च कुर्वाणाश्चित्रकूटं महागिरिम्॥
mandākinīṃ nadīṃ ramyāṃ prāṅmukhāste yayustadā |pradakṣiṇaṃ ca kurvāṇāścitrakūṭaṃ mahāgirim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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