वाल्मीकि रामायण 2.119.1
अनसूया तु धर्मज्ञा श्रुत्वा तां महतीं कथाम् ।पर्य्यष्वजत बाहुभ्यां शिरस्याघ्राय मैथिलीम्॥
anasūyā tu dharmajñā śrutvā tāṃ mahatīṃ kathām |paryyaṣvajata bāhubhyāṃ śirasyāghrāya maithilīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें