वाल्मीकि रामायण 2.119.20
एष पन्था महर्षीणां फलान्याहरतां वने ।अनेन तु वनं दुर्गं गन्तुं राघव ते क्षमम्॥
eṣa panthā maharṣīṇāṃ phalānyāharatāṃ vane |anena tu vanaṃ durgaṃ gantuṃ rāghava te kṣamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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