वाल्मीकि रामायण 2.15.3
उदिते विमले सूर्ये पुष्ये च अभ्यागते अहनि ।अभिषेकाय रामस्य द्विज इन्द्रैः उपकल्पितम्॥
udite vimale sūrye puṣye ca abhyāgate ahani |abhiṣekāya rāmasya dvija indraiḥ upakalpitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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