वाल्मीकि रामायण 2.23.2
तदा तु बद्ध्वा भ्रुकुटीम् भ्रुवोर् मध्ये नर ऋषभ ।निशश्वास महा सर्पो बिलस्यैव रोषितः॥
tadā tu baddhvā bhrukuṭīm bhruvor madhye nara ṛṣabha |niśaśvāsa mahā sarpo bilasyaiva roṣitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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