वाल्मीकि रामायण 2.33.27
स तु वेश्म पितुर्दूरा त्कैलासशिखरप्रभम् ।अभिचक्राम धर्मात्मा मत्तमातङ्गविक्रमः॥
sa tu veśma piturdūrā tkailāsaśikharaprabham |abhicakrāma dharmātmā mattamātaṅgavikramaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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