वाल्मीकि रामायण 2.33.3
ततः प्रासाद हर्म्याणि विमान शिखराणि च ।अधिरुह्य जनः श्रीमान् उदासीनो व्यलोकयत्॥
tataḥ prāsāda harmyāṇi vimāna śikharāṇi ca |adhiruhya janaḥ śrīmān udāsīno vyalokayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें