वाल्मीकि रामायण 2.42.5
ताम् नयेन च सम्पन्नो धर्मेण निवयेन च ।उवाच राजा कैकेयीम् समीक्ष्य व्यथित इन्द्रियः॥
tām nayena ca sampanno dharmeṇa nivayena ca |uvāca rājā kaikeyīm samīkṣya vyathita indriyaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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