वाल्मीकि रामायण 2.51.13
विनद्य सुमहा नादम् श्रमेण उपरताः स्त्रियः ।निर्घोष उपरतम् तात मन्ये राज निवेशनम्॥
vinadya sumahā nādam śrameṇa uparatāḥ striyaḥ |nirghoṣa uparatam tāta manye rāja niveśanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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