वाल्मीकि रामायण 2.61.1
वनम् गते धर्म परे रामे रमयताम् वरे ।कौसल्या रुदती स्वार्ता भर्तारम् इदम् अब्रवीत्॥
vanam gate dharma pare rāme ramayatām vare |kausalyā rudatī svārtā bhartāram idam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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