वाल्मीकि रामायण 2.61.3
कथम् नर वर श्रेष्ठ पुत्रौ तौ सह सीतया ।दुह्खितौ सुख सम्वृद्धौ वने दुह्खम् सहिष्यतः॥
katham nara vara śreṣṭha putrau tau saha sītayā |duhkhitau sukha samvṛddhau vane duhkham sahiṣyataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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