वाल्मीकि रामायण 2.62.16
शक्यम् आपतितः सोढुम् प्रहरः रिपु हस्ततः ।सोढुम् आपतितः शोकः सुसूक्ष्मः अपि न शक्यते॥
śakyam āpatitaḥ soḍhum praharaḥ ripu hastataḥ |soḍhum āpatitaḥ śokaḥ susūkṣmaḥ api na śakyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें