वाल्मीकि रामायण 2.62.19
तम् हि चिन्तयमानायाः शोको अयम् हृदि वर्धते ।अदीनाम् इव वेगेन समुद्र सलिलम् महत्॥
tam hi cintayamānāyāḥ śoko ayam hṛdi vardhate |adīnām iva vegena samudra salilam mahat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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