वाल्मीकि रामायण 2.79.1
ततः प्रभात समये दिवसे अथ चतुर्दशे ।समेत्य राज कर्तारः भरतम् वाक्यम् अब्रुवन्॥
tataḥ prabhāta samaye divase atha caturdaśe |sametya rāja kartāraḥ bharatam vākyam abruvan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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