वाल्मीकि रामायण 2.88.5
प्रासाद अग्र विमानेषु वलभीषु च सर्वदा ।हैम राजत भौमेषु वर आस्त्ररण शालिषु॥
prāsāda agra vimāneṣu valabhīṣu ca sarvadā |haima rājata bhaumeṣu vara āstraraṇa śāliṣu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें