वाल्मीकि रामायण 2.98.9
यावन्न राज्ये राज्यार्ह: पितृपैतामहे स्थित:।अभिषेकजलक्लिन्नो न मे शान्तिर्भविष्ऺयति॥
yāvanna rājye rājyārha: pitṛpaitāmahe sthita: |abhiṣekajalaklinno na me śāntirbhaviṣऺyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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