वाल्मीकि रामायण 3.10.10
सर्वैः एव समागम्य वाक् इयम् समुदाहृता ।राक्षसैः दण्डकारण्ये बहुभिः काम रूपिभिः॥
sarvaiḥ eva samāgamya vāk iyam samudāhṛtā |rākṣasaiḥ daṇḍakāraṇye bahubhiḥ kāma rūpibhiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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