वाल्मीकि रामायण 3.13.16
हृदयस्थः च ते छन्दो विज्ञातः तपसा मया ।इह वासम् प्रतिज्ञाय मया सह तपो वने॥
hṛdayasthaḥ ca te chando vijñātaḥ tapasā mayā |iha vāsam pratijñāya mayā saha tapo vane ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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