वाल्मीकि रामायण 3.21.16
तव चैव अग्रतः प्राणान् त्यक्ष्यामि निरपत्रपा ।बुद्ध्या अहम् अनुपश्यामि न त्वम् रामस्य संयुगे॥
tava caiva agrataḥ prāṇān tyakṣyāmi nirapatrapā |buddhyā aham anupaśyāmi na tvam rāmasya saṃyuge ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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