वाल्मीकि रामायण 3.22.2
तव अपमान प्रभवः क्रोधो अयम् अतुलो मम ।न शक्यते धारयितुम् लवण अंभ इव उल्बणम्॥
tava apamāna prabhavaḥ krodho ayam atulo mama |na śakyate dhārayitum lavaṇa aṃbha iva ulbaṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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