वाल्मीकि रामायण 3.28.5
ज्याम् विधुन्वन् सुबहुशः शिक्षया अस्त्राणि दर्शयन् ।चचार समरे मार्गान् शरै रथ गतः खरः॥
jyām vidhunvan subahuśaḥ śikṣayā astrāṇi darśayan |cacāra samare mārgān śarai ratha gataḥ kharaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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