वाल्मीकि रामायण 3.30.14
दृढम् खलु अवलिप्तो असि भयेषु अपि च निर्भयः ।वाच्य अवाच्यम् ततो हि त्वम् मृत्यु वश्यो न बुध्यसे॥
dṛḍham khalu avalipto asi bhayeṣu api ca nirbhayaḥ |vācya avācyam tato hi tvam mṛtyu vaśyo na budhyase ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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