वाल्मीकि रामायण 3.34.1
आश्रमम् प्रति याते तु खरे खर पराक्रमे ।तान् एव औत्पातिकान् रामः सह भ्रात्रा ददर्श ह॥
āśramam prati yāte tu khare khara parākrame |tān eva autpātikān rāmaḥ saha bhrātrā dadarśa ha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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