वाल्मीकि रामायण 3.34.11
अनागत विधानम् तु कर्तव्यम् शुभम् इच्छता ।आपदम् शंकमानेन पुरुषेण विपश्चिता॥
anāgata vidhānam tu kartavyam śubham icchatā |āpadam śaṃkamānena puruṣeṇa vipaścitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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