वाल्मीकि रामायण 3.36.3
त्रिशिराः च महातेजा राक्षसः पिशित अशनः ।अन्ये च बहवः शूरा लब्ध लक्षा निशाचराः॥
triśirāḥ ca mahātejā rākṣasaḥ piśita aśanaḥ |anye ca bahavaḥ śūrā labdha lakṣā niśācarāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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