वाल्मीकि रामायण 3.38.1
कदाचित् अपि अहम् वीर्यात् पर्यटन् पृथिवीम् इमाम् ।बलम् नाग सहस्रस्य धारयन् पर्वतोपमः॥
kadācit api aham vīryāt paryaṭan pṛthivīm imām |balam nāga sahasrasya dhārayan parvatopamaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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