वाल्मीकि रामायण 3.47.11
अष्टा दश हि वर्षाणि मम जन्मनि गण्यते ।राम इति प्रथितो लोके सत्यवान् शीलवान् शुचिः॥
aṣṭā daśa hi varṣāṇi mama janmani gaṇyate |rāma iti prathito loke satyavān śīlavān śuciḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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