वाल्मीकि रामायण 3.47.12
विशालाक्षो महाबाहुः सर्व भूत हिते रतः ।कामार्तः च महाराजः पिता दशरथः स्वयम्॥
viśālākṣo mahābāhuḥ sarva bhūta hite rataḥ |kāmārtaḥ ca mahārājaḥ pitā daśarathaḥ svayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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