वाल्मीकि रामायण 3.47.14
कैकेयी मम भर्तारम् इति उवाच द्रुतम् वचः ।तव पित्रा समाज्ञप्तम् मम इदम् शृणु राघव॥
kaikeyī mama bhartāram iti uvāca drutam vacaḥ |tava pitrā samājñaptam mama idam śṛṇu rāghava ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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