वाल्मीकि रामायण 3.47.25
एवम् ब्रुवत्याम् सीतायाम् राम पत्नीआम् महाबलः ।प्रत्युवाच उत्तरम् तीव्रम् रावणो राक्षसाधिपः॥
evam bruvatyām sītāyām rāma patnīām mahābalaḥ |pratyuvāca uttaram tīvram rāvaṇo rākṣasādhipaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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