वाल्मीकि रामायण 3.47.31
पंच दास्यः सहस्राणि सर्व आभरण भूषिताः ।सीते परिचरिष्यन्ति भार्या भवसि मे यदि॥
paṃca dāsyaḥ sahasrāṇi sarva ābharaṇa bhūṣitāḥ |sīte paricariṣyanti bhāryā bhavasi me yadi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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