वाल्मीकि रामायण 3.49.2
स मैथिलीम् पुनः वाक्यम् बभाषे वाक्य कोविदः ।न उन्मत्तया श्रुतौ मन्ये मम वीर्य पराक्रमौ॥
sa maithilīm punaḥ vākyam babhāṣe vākya kovidaḥ |na unmattayā śrutau manye mama vīrya parākramau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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