वाल्मीकि रामायण 3.54.2
तेषाम् मध्ये विशालाक्षी कौशेयम् कनक प्रभम् ।उत्तरीयम् वरारोहा शुभानि आभरणानि च॥
teṣām madhye viśālākṣī kauśeyam kanaka prabham |uttarīyam varārohā śubhāni ābharaṇāni ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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