वाल्मीकि रामायण 3.54.6
जगाम रुदतीम् गृह्य मैथिलीम् राक्षस ईश्वरः ।ताम् जहार सुसंहृष्टो रावणो मृत्युम् आत्मनः॥
jagāma rudatīm gṛhya maithilīm rākṣasa īśvaraḥ |tām jahāra susaṃhṛṣṭo rāvaṇo mṛtyum ātmanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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