वाल्मीकि रामायण 3.66.18
माम् एवम् हि पुरा वीर त्वम् एव बहुशो उक्तवान् ।अनुशिष्यात् हि को नु त्वाम् अपि साक्षात् बृहस्पतिः॥
mām evam hi purā vīra tvam eva bahuśo uktavān |anuśiṣyāt hi ko nu tvām api sākṣāt bṛhaspatiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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