वाल्मीकि रामायण 3.66.1
तम् तथा शोक संतप्तम् विलपंतम् अनाथवत् ।मोहेन महता आविष्टम् परिद्यूनम् अचेतनम्॥
tam tathā śoka saṃtaptam vilapaṃtam anāthavat |mohena mahatā āviṣṭam paridyūnam acetanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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