वाल्मीकि रामायण 3.66.3
महता तपसा राम महता च अपि कर्मणा ।राज्ञा दशरथेन असि लब्धो अमृतम् इव अमरैः॥
mahatā tapasā rāma mahatā ca api karmaṇā |rājñā daśarathena asi labdho amṛtam iva amaraiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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