वाल्मीकि रामायण 3.70.1
तौ तु तत्र स्थितौ दृष्ट्वा भ्रातरौ राम लक्ष्मणौ ।बाहु पाश परिक्षिप्तौ कबन्धो वाक्यम् अब्रवीत्॥
tau tu tatra sthitau dṛṣṭvā bhrātarau rāma lakṣmaṇau |bāhu pāśa parikṣiptau kabandho vākyam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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