वाल्मीकि रामायण 3.70.16
त्वम् तु को वा किम् अर्थम् वा कबन्ध सदृशो वने ।आस्येन उरसि दीप्तेन भग्न जन्घो विचेष्टसे॥
tvam tu ko vā kim artham vā kabandha sadṛśo vane |āsyena urasi dīptena bhagna jangho viceṣṭase ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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