वाल्मीकि रामायण 3.70.3
तत् श्रुत्वा लक्ष्मणो वाक्यम् प्राप्त कालम् हितम् तदा ।उवाच आर्तिम् समापन्नो विक्रमे कृत निश्चयः॥
tat śrutvā lakṣmaṇo vākyam prāpta kālam hitam tadā |uvāca ārtim samāpanno vikrame kṛta niścayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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