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वाल्मीकि रामायण 4.22.32
ततः तु तारा व्यसन अर्णव प्लुतामृतस्या भर्तुर् वदनम् समीक्ष्य सा ।जगाम भूमिम् परिरभ्य वालिनम्महा द्रुमम् छिन्नम् इव आश्रिता लता॥
tataḥ tu tārā vyasana arṇava plutāmṛtasyā bhartur vadanam samīkṣya sā |jagāma bhūmim parirabhya vālinammahā drumam chinnam iva āśritā latā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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