वाल्मीकि रामायण 4.22.4
युगपद् विहितम् तात न मन्ये सुखम् अवयोः ।सौहार्दम् भ्रातृ युक्तम् हि तद् इदम् जातम् अन्यथा॥
yugapad vihitam tāta na manye sukham avayoḥ |sauhārdam bhrātṛ yuktam hi tad idam jātam anyathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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